लोगों के आग्रह पर 1996 में डॉ. अरविन्द शर्मा ने सोनीपत संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़ा और अपनी जमीनी स्तर के व्यक्तित्व एवं दलितों, छात्रों, महिलाओं, शिक्षाशास्त्री बुद्धिजीवियों दलित, किसानों के साथ अच्छे संपर्क की वजह से बड़े मार्जिन के साथ जीत दर्ज की । उनका सोनीपत संसदीय क्षेत्र में सभी वर्गों और जातियों में बड़ा और स्थिर वोट बैंक था। उन्होंने अपनी जीत के लिए किसी भी स्थापित राजनैतिक पार्टी के प्रति निष्ठा नहीं व्यक्त की। 1999 में वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने स्वयं के वित्तीय और तकनीकी संसाधनों के द्वारा हैंडपंप/ नलकूपों को लगवाकर बड़े स्तर पर पोर्टेबल पानी उपलब्ध कराया। सोनीपत में कुछ ट्रेनों का ठहराव भी करवाया।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2000 में सोनीपत संसदीय क्षेत्र के गोहाना, सफीदों, जुलाना, कैलाना, रोहट, राई, बरौदा, विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार अभियान चलाया।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2000 में रोहतक संसदीय क्षेत्र के कलाई, बहादुरगढ़, हसनगढ़, बेरी, झज्जर, महम, विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार अभियान चलाया।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2000 में नरवाना, विधानसभा क्षेत्र में प्रचार करने का अभियान चलाया।
2003 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक के रुप में नियुक्त किया गया।
2004 में उन्होंने करनाल संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा और अपने प्रतिद्वंदी को रिकार्ड वोटों से फिर से हराया।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने लोगों और क्षेत्र के विकास के कल्याण के लिए बहुत मेहनत की, लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये वित्तीय सहायता के रुप में जिला विकास योजना, विशेष विकास योजना और हरियाणा ग्रामीण विकास निधि योजना से और संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) के तहत दिया गया इससे चौपाल, सामुदायिक भवन, गलियां, श्मशान मैदान के चारों ओऱ दीवार का निर्माण किया गया एवं आंगनवाड़ियों की स्थापना कराई, पीने के साफ पानी उपलब्ध कराया, कच्ची गलियों को सिमेंटिड रोड में बदलवाया। इस कार्यकाल के दौरान सबसे मुख्य कार्य पानीपत में एलिवेटेड फ्लाईओवर का निर्माण रहा जिससे पानीपत शहर को यातायात के जाम से निजात मिली।
वह कभी जातिगत राजनीति में लिप्त नहीं हुए और सभी छत्तीस बिरादरी की सेवा की। एक प्रतिबद्ध युवा नेता के रुप में उन्होंने गरीब दलित किसानों और अल्पसंख्यकों की सेवा करना जारी रखा। उनके दरवाजे हर किसी का स्वागत करने के लिए 24 घंटे खुले हैं और किसी भी समय हर आगंतुक का सामाजिक शिष्टाचार के साथ स्वागत किया जाता है सही मायने में उनके घर में अतिथि देवो भवः के प्रत्यक्ष रुप से दिखाई देता है। वह भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद 2004 के पूर्व सदस्य थे। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस 2004 की सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य रहे। 2004 विदेश मंत्रालय की स्थायी समिति के पूर्व सदस्य रहे। रेलवे समिति 2004 के पूर्व सदस्य रहे।
2009 में उन्होंने फिर से करनाल संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीता, लोगों ने उनके अच्छे कर्म औऱ सेवाओं को स्वीकार किया। वह आज भी कांग्रेस से संसद सदस्य हैं।
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