डॉं अरविन्द शर्मा का जन्म 12 अक्तुबर 1963 को रोहतक, हरियाणा में हुआ था। उनके पिता एक सेवानिवृत्तप्राचार्यऔर माता एक विनम्र गृहिणी हैं। उनकी स्कूली शिक्षा केन्द्रीय विधालय से हुई। उन्होंने डेंटल कॉलेज रोहतक से बी.डी.एस. किया। उन्होंने एम.डी.एस. (प्रोस्थोडोन्टिक्स) अहमदाबाद से किया। उनकी पत्नी डॉ. रीता शर्मा जो कि पेशे से रेडियोलॉजिस्ट हैं। उनके दो प्यारे बच्चों में एक बेटी अकक्षयता शर्मा और एक बेटा चंद्रिल भारद्वाज हैं। डॉ. अरविंद शर्मा करिश्माई गतिशील, विनम्र, ईमानदार एंव जमीन से जुड़ें व्यक्ति हैं।
डॉ. अरविन्द शर्मा गांव माजरा, बहादुरगढ़ जिला झज्जर के हैं और अपनी एम. डी. एस. दंत शल्य चिकित्सा की शिक्षा पुरी करने के बाद जनता की सेवा में आए। डॉ. शर्मा ने दिल्ली में अपने क्लिनिक शुरु करने से पहले कुछ वर्षों के लिए हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज, सोनिपत में डेंटल सर्जन के रुप में काम किया। उनका क्लिनिक बहुत अच्छी तरह से विकसित हुआ। क्लिनिक के साथ साथ उन्होंने सामाजिक कार्य भी किया। इनके दादा, पिता और मां जो कि एक पवित्र और महान जीवन का नेतृत्व करने वाले हैं, उनसे उन्हें सामाजिक जीवन में मजबूत नेतृत्व करने व समाज सेवा की प्रेरणा मिली। ग्रामीण लोगों की दयनीय स्थिति में सुधार करने के लिए, ग्रामीण क्षेत्र में पीने योग्य पानी की कमी को दूर करने के लिए व भोजन दवाईयों की कमी को दूर करने के लिए उन्होंने अपन क्लिनिक का कार्य छोड़कर ग्रामीण लोगों की सेवा में जी जान से कार्य करने का फैसला लिया। जल्दी ही कई सामाजिक कार्यकर्ता और परोपकारी संगठन उनके बेड़े में शामिल हो गए और वह एक बड़ी टीम बनाने में सफल हुए। 1995 में हरियाणा का बाढ़ से बहुत बड़ा क्षेत्र तबाह हो गया और उन्हें उस समय लोगों की 24 घंटे सेवा समर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने उस दौरान सोनीपत और आसपास के स्थानों में लोगों के लिए राहत कार्य की व्यवस्था की तथा सोनीपत तथा आसपास के क्षेत्र में चिकित्सा शिविर, राहत सामग्री वितरित कर लोगों की सहायता की।
राजनीति में जाना कभी उनकी किताब में नहीं लिखा था लेकिन वह जाति और संप्रदाय से उपर उठकर किसानों, कारीगरों, बुद्धिजीवियों के भारी समर्थन ने उनको राजनीति में प्रवेश करने के लिए प्रेरित किया। पहले वे पूरी तरह से अराजनैतिक थे। लोगों के विश्वास व प्रेम के बल पर वास्तव में उन्होंने आम चुनाव के लिए सिर्फ दो महीने पहले राजनीति में कदम रखा इससे पहले वह केवल सामाजिक कार्यों से जुड़ें थे। इस प्रकार प्रदेश को एक नवोदित और युवा सामाजिक कार्यकर्ता जनता के प्रतिनिधि के रुप में मिला।
उन्होंने अपना पहला चुनाव पंचायत राज व्यवस्था के मुद्दे पर लड़ा। जिस पंचायती राज संघर्ष मोर्चा का गठन जून 1995 में हरियाणा राज्य में जिला परिषद द्वितीय स्तर का पंचायती चुनाव के तुरंत बाद बना, इस सामाजिक संगठन के आप संचालक थे औरइस संगठन ने पंचायती राज के लिए काम किया।
सोनीपत के 750 गांवों में से 150 गांवों में पीने के पानी की समस्या थी और दूसरी समस्या नौकरी पेशा लोगों को गन्तव्य स्थल तक आने जाने की। डॉ. अरविन्द शर्मा जी ने यह सुनिश्चित किया कि सोनीपत से दिल्ली हर रोज हजारों की संख्या में यात्रा करने वाले लोगों की यात्रा सुविधापूर्ण तथा सुगम हो तथा इस समस्या के समाधान के लिए सोनीपत से दिल्ली को जोड़ने वाली ट्रेनों की संख्या में तत्काल बढोत्तरी की आवश्यकता पर बल दिया। जिससे औधोगिक श्रमिकों और कार्यालय जाने वालों के समय की पाबंदी सुनिश्चित हो तथा औधोगिक इकाईयों के उत्पादन का बढ़ावा मिले।
उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के उधोगपति व औधोगिक इकाईयों को स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित किया जिससे कि स्थानीय लोग जो कि आजीविका कमाने के लिए दिल्ली आते जाते थे उन्हें स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध हो। गोहाना क्षेत्र में जहां पर चीनी मिल का वजूद नहीं था वहां पर एक पूरी तरह कार्यात्मक चीनी मिल की स्थापना करवाई जिससे स्थानीय किसान दूर दराज के शहर के बजाए गोहाना चीनी मिल में ही सीधे गन्ना ले जाए। इससे सीधे और परोक्ष रुप से हजारों लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हुआ है।
वह समाज के सभी जाति, वर्गों, युवा और बुजुर्गों में प्रसिद्ध थे। वह दिन में 18 घंटे काम किया करते थे जो कि आजतक निर्विघ्न रुप से जारी है। वह हमेशा जागरूक रहते हैं और अपनी स्वाभाविक विनम्रता और सुसंगत शिष्टाचार के लिए जाने जाते हैं।


